
बोल विनायक बोल
बोल विनायक बोल
क्यों गरीब का लोकतंत्र में अब तक पत्ता गोल
बोल विनायक बोल
बोल कि क्या है सलवा जुडुम, कैसी उसकी मार
बोल कि कैसे कुचल रहे हैं, लोगों के अधिकार
बोल कि अंधा शासन क्यों है इतना डावांडोल
बोल विनायक बोल
अरे डाॅक्टर बाबू बोलो, क्यों गरीब बीमार
कहीं रोग है और कहीं का, करे इलाज सरकार
क्यों गरीब की सुनवाई में होती टालमटोल
बोल विनायक बोल
क्या गरीब माओ को समझे, क्या गांधी को भाई
भूखे पेट ही सोना होगा हुई न अगर कमाई
वो बैरी सत्ता के मद में आंक न पाए मोल
बोल विनायक बोल
जन विशेष कानून बनाए जिसमें न सुनवाई
राजनीति के पंडित कैसे बन जाते हैं कसाई
सीधी साधी जनता पिसती, सत्ता पीटे ढोल
बोल विनायक बोल
करे कोई और भरे कोई है, ये कैसा दस्तूर
बेकसूर को सजा मिली और न्याय खड़ा मजबूर
इक दिन तो इंसाफ मिलेगा, यही सोच अनमोल
बोल विनायक बोल
बोल विनायक बोल
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ओ कानून कसाई।
तूने कैसी की सुनवाई।।
बिन सबूत ही संत ने जैसे उमर कैद है पाई।।
अंगरेजों ने जैसे तिलक को सजा सुनाई।
देशद्रोह में गांधी को जेल की हवा खिलाई।
और आज इस लोकतंत्र में फंसे विनायक भाई।।
ओ कानून कसाई......
कैदी से कानूनन मिलने में नहीं बुराई
जेलर ने पहरे में मुलाकात करवाई
अब वे कहते हैं कि तुमने खबर उधर पहुंचाई
ओ कानून कसाई....
रोग को पहचाना और रोगी की करी भलाई
रोग तो सरकारी था, फंसा डाॅक्टर भाई
यह सरकार भी रोगी भैया, इसको भी दो दवाई
ओ कानून कसाई.....

बी.एस.एन.एल. के