Monday, February 23, 2009

तुषार धवल का पहला कविता संग्रह


मैं चाहता था कि तुषार की किताब की समीक्षा अनुनाद पर करुँ लेकिन दूसरी कई व्यस्तताओं के कारण यह सम्भव नहीं हो पाया। समीक्षा के रूप में मैंने कुछ लिखा भी तो वो मुझे पर्याप्त नहीं लगा, सो अब समीक्षा को किसी पत्रिका के लिए छोड़ता हूँ और प्यारे दोस्त तुषार को उनके पहले संकलन के लिए बधाई देता हूँ। फोन पर वरिष्ठ कवि चंद्रकांत देवताले ने इस संकलन को "शानदार आवरण और उतनी ही शानदार कविताओं वाला संकलन " कहा है। गौरतलब है कि आवरण पर ख़ुद तुषार की बनाई पेंटिंग है। तुषार कविता के साथ - साथ अनुवाद, अभिनय और पेंटिंग में भी रूचि रखते हैं। उन्हें अनुनाद पर यहाँ भी पढ़ा जा सकता है। हमारे इस बेहद प्रतिभाशाली मित्र को एक बार फ़िर बधाई और आगे के सफ़र की शुभकामनाएं !


पहर यह बेपहर का (कविता संकलन) - तुषार धवल
राजकमल प्रकाशन
१- बी, नेताजी सुभाष मार्ग, नई दिल्ली - २
पृष्ठ - १६०
मूल्य- २००

1 comment:

  1. आजकल पढ रहे है जी। वैसे जितना अब तक पढ पाया हूँ वो गजब का है।

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